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फसल बीमा की एबीसीडी : कुदरत के जोखिम से किसान कैसे बचें


फसल बीमा की एबीसीडी : कुदरत के जोखिम से किसान कैसे बचें


Posted By: Ameeta  |  Posted Date: 02-10-2025

   खेती शायद दुनिया का एकमात्र ऐसा व्यवसाय है, जिसमें मेहनत किसान करता है, अपनी जमा पूंजी किसान लगाता है, लेकिन अच्छी या बुरी फसल का अंतिम फैसला मौसम करता है। खेत में समय पर बुआई हो जाए, अच्छी खाद और सिंचाई मिल जाए, फिर भी यह जरूरी नहीं है कि फसल घर तक सुरक्षित पहुंच ही जाएगी। कभी बेमौसम बारिश, कभी बाढ़, कभी ओलावृष्टि, कभी सूखा, तो कभी तेज आंधी और जलभराव। प्रकृति का एक झटका किसान की महीनों की मेहनत और लाखों की लागत को खाक कर सकता है। हाल के कुछ सालों में तो मौसम का मिजाज अनेक कारणों से पहले से ज्यादा अनिश्चित हुआ है। उत्तर भारत में कहीं कम बारिश से फसलें सूखे रही हैं, तो कहीं कुछ ही घंटों की मूसलाधार बारिश खेतों को तालाब बनाये दे रही है। ऐसे में खेती अब केवल अच्छी उपज लेने का काम नहीं रह गई बल्कि जोखिम का समझदारी से प्रबंधन करना भी अब उतना ही जरूरी हो गया है। यहीं से शुरू होती है खेती की दुनिया में फसल बीमा की भूमिका। बहुत से किसान इसके बारे सुनते तो हैं, लेकिन अब भी ऐसे किसानों की तादाद लाखों में है, जिनके मन में इसे लेकर कई तरह के सवाल हैं। जैसे फसल बीमा आखिर है क्या? इसे कौन करा सकता है? इसे कराने के लिए कितना पैसा देना पड़ता है? नुकसान होने पर दावा कैसे मिलता है? क्या हर किसान को इसका लाभ मिल सकता है? और सबसे महत्वपूर्ण कहीं ऐसा तो नहीं है कि जानकारी के अभाव में हम अपने इस अधिकार से ही वंचित रह जाएं ?

   दरअसल फसल बीमा कोई मुआवजा राशि नहीं है बल्कि खेती को आर्थिक सुरक्षा देने का एक उपाय अर्थात सुरक्षा कवच है। जिस तरह परिवार अपने स्वास्थ्य का और वाहन मालिक अपने वाहन का बीमा कराता है, उसी तरह किसान अपनी फसल को प्राकृतिक जोखिमों से बचाने के लिए बीमा करा सकता है। यह बीमा नुकसान की पूरी तरह से भरपायी तो नहीं कर सकता और न ही नुकसान को रोक सकता है। लेकिन नुकसान के बाद किसान को दोबारा खड़ा होने की ताकत जरूर देता है। यहां हम वास्तव में फसल बीमा की एबीसीडी के बारे में बिल्कुल सरल भाषा और उतने ही सरल तरीके से समझेंगे। मसलन बीमा क्या है, इसे कैसे कराएं, यह कब काम आता है, इसका दावा कैसे किया जाता है यानि फसल बीमा के बारे में सारी छोटी से छोटी बातें हम इस समय जानेंगे ताकि गैरजानकारी के चलते किसान कुदरत के कहर का शिकार न हो। ...तो आइये सिलसिलेवार ढंग से समझते हैं कि एक साधारण किसान फसल बीमा का फायदा कैसे उठा सकता है? 

फसल बीमा क्या होता है?

   जैसा कि हमने पहले ही बताया है कि फसल बीमा किसानों को मिलने वाला सरकार से कोई मुआवजा नहीं है बल्कि यह खेती का सुरक्षा कवच है ताकि कुदरत के कहर से खेती को अगर नुकसान पहुंचे, तो उसकी इतनी सहायता हो सके कि वह दोबारा से उठ खड़ा हो। जैसे आप मोटर साइकिल का बीमा कराते हैं ताकि दुर्घटना होने पर आर्थिक नुकसान की भरपायी हो सके, उसी तरह से फसल बीमा प्राकृतिक आपदाओं से फसल खराब होने पर किसान को आर्थिक सहायता देने की एक व्यवस्था है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कोई बीमा कंपनी किसान की पूरी फसल खरीद लेती है या पूरे नुकसान की भरपायी कर देती है। इसका उद्देश्य सिर्फ किसान को आर्थिक सहाराभर देना होता है ताकि वह अगली फसल की तैयारी कर सके। फसल बीमा की जरूरत इसलिए पड़ती है, क्योंकि खेती एक ऐसा व्यवसाय है, जिसमें किसान के नियंत्रण से बाहर एक नहीं अनेक किस्म के जोखिम होते हैं। जैसे सूखा पड़ जाना, बाढ़ आ जाना, जलभराव, ओलावृष्टि, अकस्मात आया चक्रवात या तेज आंधी, बादल फटना, अचानक फसल को कोई बीमारी लग जाना या कुछ विशेष परिस्थितियों में बुआई आदि न हो पाना। इन कारणों से किसान को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है। फसल बीमा दरअसल इसी जोखिम को कम करने का एक तरीका है। 

कौन करा सकता है फसल बीमा?

   आमतौर पर अपनी जमीन पर खेती करने वाला किसान फसल बीमा करा सकता है। लेकिन कुछ राज्यों में बटाईदार या पट्टेदार किसान भी यह लाभ ले सकते हैं। लेकिन यह सुविधा आपके राज्य में है या नहीं, इसकी जानकारी आपको जिला या तहसील के कृषि संबंधी कार्यालय से मिलेगी या फिर संबंधित राज्य की कृषि संबंधी वेबसाइट या खाद और बीज की सहकारी दुकानों से। बहरहाल ऋण लेने वाले किसान, बिना कृषि ऋण वाले किसान, ये अलग-अलग पात्राएं होती हैं, जो अलग-अलग राज्यों में थोड़े बहुत फेरबदल के साथ मौजूद होती हैं। इसलिए खास अपने संबंध में जानकारी आपको स्थानीय स्तर पर ही मिलेगी। जहां तक फसल बीमा कैसे कराया जाता है का सवाल है तो ज्यादातर राज्यों में इसका तरीका यह है- उन बैंकों का पता लगाइये जो फसल बीमा करती हैं, विशेषकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और दूसरे सरकारी बैंक भी करते हैं। इसके बाद अपने पास वाले बैंक की शाखा पर जाइये या आजकल किसानों की मदद के लिए कॉमन सर्विस सेंटर खुल गये हैं, वहां भी सारी जानकारी और बीमा कराने के तौर तरीके बताये जाते हैं। सहकारी बैंक भी इसी काम के लिए होते हैं। इसके अलावा अधिकृत बीमा कंपनियां यानि सरकार ने जिन्हें किसानों की फसल के बीमा का अधिकार दिया है, वहां से भी जाकर पता कर सकते हैं। लेकिन अगर इन सब जगह न जाएं तो ऑनलाइन पोर्टल पीएमएफबीवाई में लॉग ऑन करें। यहां न सिर्फ फसल बीमा कैसे कराया जाता है, इसकी सम्पूर्ण जानकारी होती है बल्कि यहीं से आवेदन भी हो जाता है। आवेदन के लिए जरूरी होता है- आधार कार्ड, बैंक खाता, मोबाइल नंबर और अगर लागू होता हो तो भूमि संबंधी दस्तावेज की कॉपी तथा बोई गई फसल का विवरण। इन जानकारियों के आधार पर फसल बीमा कराया जा सकता है।

इसके लिए किसान को कितना पैसा देना पड़ता है?

   याद रखिए फसल बीमा पूरी तरह से मुफ्त नहीं होता। किसान को प्रीमियम का एक छोटा हिस्सा देना होता है जबकि शेष राशि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर वहन करती हैं। यह बात आपको संबंधित बीमा कंपनी या बैंक अच्छे से बता देगी। जहां तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का सवाल है तो इसमें अधिसूचित खरीफ फसलों के लिए किसानों के हिस्से का प्रीमियम आमतौर पर 2 प्रतिशत, जबकि रबी की फसलों के लिए 1.5 प्रतिशत प्रीमियम की दरकार होती है और व्यवसायिक बागवानी फसलों के लिए इसकी दर 5 प्रतिशत रखी गई है बाकी प्रीमियम सरकार देती है। जब एक बार बीमा हो जाता है तो फिर हमें यह पता होना चाहिए कि नुकसान होने पर आखिर पैसा मिलता कैसे है? तो यदि बीमित फसल प्राकृतिक कारणों से खराब हो जाती है, तो किसान को निर्धारित प्रक्रिया के मुताबिक अपने नुकसान की सूचना देनी होती है। कुछ स्थितियों में तो नुकसान की सूचना निर्धारित समय के भीतर मसलन 72 या 100 घंटे के भीतर ही देनी होती है। इसके बाद संबंधित एजेंसियां सर्वे या निर्धारित आंकलन प्रक्रिया अपनाती हैं। 

   बाद में पात्र होने पर आपके दावे की राशि सीधे बैंक के खाते में पहुंच जाती है। लेकिन इस बात को भी ध्यान में रखिए कि हर नुकसान पर बीमा का पैसा नहीं मिलता। बीमा केवल उन्हीं परिस्थितियों में लागू होता है, जिन परिस्थितियों का योजना की शर्तों में जिक्र होता है और जो आपके जिले की अधिसूचना में शामिल हों। उदाहरण के लिए यदि फसल खराब हुई, लेकिन वह जोखिम योजना में शामिल नहीं थी, तो लाभ नहीं मिलेगा। यदि किसान ने समय पर नुकसान की सूचना नहीं दी, तो भी लाभ मिलने में समस्या हो सकती है और यदि संबंधित फसल का बीमा नहीं हुआ होता, तब भी दावा नहीं मिलेगा और हां एक बात यह भी समझ लीजिए कि फसल खराब होते ही बीमा कंपनियां पैसे नहीं दे देंगी। पहले इसे देखा जायेगा कि किसान का बीमा हुआ था या नहीं, फिर यह देखा जायेगा कि नुकसान किस कारण से हुआ है, अगर वह कारण योजना के दायरे में आता है, तभी पैसे मिलेंगे। अगर नहीं आता तो नहीं मिलेंगे। मतलब यह कि सारी आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही दावा मिलता है। 

 किसानों द्वारा की जाने वाली गलतियां

आमतौर पर अगर फसल बीमा पर बात की जाए तो बहुत से किसान यह कहते मिल जाते हैं कि उन्हें तो बीमा का लाभ नहीं मिला और वे यह भी कहते मिल जाएंगे कि यह सब बड़ी-बड़ी बातें हैं, कंपनियां बीमा के पैसे नहीं देतीं। लेकिन अगर कई किसानों के साथ ऐसा होता है तो यह मान लीजिए कि यह उनकी गलतियों के कारण होता है, क्योंकि ज्यादातर किसान फसल बीमा कराते समय सावधान नहीं रहते और आमतौर पर इस तरह की गलतियां करते हैं।

किसान कई बार अपने आप यह मान लेते हैं कि बैंक ने खुद ही बीमा कर दिया होगा। याद रखिए बैंक कभी भी अपनी तरफ से आपकी फसल का बीमा नहीं करता।

कई किसान बीमा कराने के बाद बीमा रसीद लेना जरूरी नहीं समझते या भूल जाते हैं। ऐसे किसानों को भी बीमा की भरपायी नहीं होती। 

कुछ किसान समय पर नुकसान की सूचना नहीं देते, उन्हें लगता है बैंक को तो खुद ही मालूम है कि नुकसान हो गया है या कई किसानों को लगता है किसी दिन जाकर दे देंगे। जबकि ज्यादातर मामलों में नुकसान की सूचना देने का एक निश्चित समय होता है।

कई किसान गलत फसल का विवरण देते हैं। उन्हें भी बीमा राशि नहीं मिलती। कई किसान अपने बीमा के दस्तावेज सुरक्षित नहीं रखते, इन छोटी-छोटी गलतियों के कारण न केवल दावा प्रक्रिया कठिन हो जाती है बल्कि कई बार किसान भुगतान से भी वंचित हो जाते हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि आखिर फसल बीमा कराते समय किसानों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी क्या है? 

बीमा रसीद को संभालकर रखना चाहिए। 

आवेदन संख्या जरूर लिखी होनी चाहिए।

फसल की जानकारी सही समय पर देनी जरूरी है।

नुकसान होने पर तुरंत सूचना देना अपने मिलने वाले लाभ को सुरक्षित करना होता है।

नुकसान से संबंधित फसल की फोटो और वीडियो रखना चाहिए और हां, आपका बैंक खाता और मोबाइल नंबर भी हर समय सक्रिय होने चाहिए तभी सही से फसल बीमा का लाभ मिल पाता है।

फसल बीमा का लाभ मिले इसके लिए क्या सावधानी बरतना जरूरी है?

यदि आप हर साल खेती करते हैं और हमेशा फसलों पर कुदरती जोखिम का साया मंडराता रहता है, तो ये बातें आपको जान लेना जरूरी हैं।

सबसे पहले यह पता करें कि आपके जिले में कौन-कौन सी फसलें बीमा के लिए अधिसूचित हैं। इसकी जानकारी कई स्तरों पर मिल सकती है। जिले या तहसील में स्थित किसान केंद्र से, बीमा कंपनियों से, बैंक से और सहकारी कृषि बीज सोसायटियों से भी यह जानकारी हासिल हो सकती है।

आपको यह जानना भी जरूरी है कि किसी फसल का बीमा कब कराना जरूरी होता है। याद रखिए हर फसल के लिए बीमा का एक निश्चित समय होता है।

अगर बीमा हो गया है तो अपनी बीमा रसीद को, साथ ही दूसरे संबंधित दस्तावेजों को सुरक्षित रखना होगा और समय पर मांगे जाने पर तुरंत उपलब्ध कराना होगा।

अगर आपकी फसल को नुकसान हो जाता है तो नुकसान होते ही इसकी जो निर्धारित प्रक्रिया है, उसी के मुताबिक बीमा कंपनी या बैंक को उसकी सूचना दें।

अपने दावे और शिकायत की स्थिति पर नियमित नजर रखें और संबंधित एजेंसी या बैंक से लगातार संपर्क मे रहें।

याद रखिए यदि किसान की पूरी फसल बाढ़ में नष्ट हो जाती है, तो उसे अगली फसल बोने के लिए फिर से बीज, खाद और दूसरे साधनों को जुटाना कठिनाई भरा काम होता है इसलिए फसल बीमा कराना जरूरी होता है। मगर इससे यह कतई न मान लें कि फसल बीमा कोई लाभ कमाने की योजना है। यह सिर्फ जोखिम से बचाने का एक उपाय है।

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